Description
भक्तामर रक्षा पोटली
भक्तामर स्तोत्र की आध्यात्मिक ऊर्जा से प्रेरित भक्तामर रक्षा पोटली श्रद्धा, सकारात्मकता, सुख-शांति एवं आध्यात्मिक संरक्षण की भावना का प्रतीक है। इसे विधिपूर्वक धारण करते समय श्रद्धा और सकारात्मक भाव रखना महत्वपूर्ण है।
भक्तामर रक्षा पोटली कैसे धारण करें?
सबसे पहले स्नान आदि करके शुद्ध एवं स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
शांत एवं स्वच्छ स्थान पर बैठकर भक्तामर रक्षा पोटली को अपने दाहिने हाथ में रखें।
पोटली के ऊपर अपना दूसरा हाथ रखें और श्रद्धापूर्वक 3 नवकार मंत्र का जाप करें।
इसके बाद भक्तामर स्तोत्र की प्रथम गाथा का श्रद्धापूर्वक स्मरण/पाठ करें।
अब अपने मन में सुख-शांति, स्वस्थता, सकारात्मकता एवं आर्थिक उन्नति की शुभ भावना रखते हुए रक्षा पोटली का संकल्प 3 बार बोलें।
संकल्प के बाद पुनः 3 नवकार मंत्र का जाप करें।
इसके पश्चात भक्तामर रक्षा पोटली को अपने दाहिने हाथ में श्रद्धापूर्वक बाँधें।
रक्षा पोटली संकल्प
श्रद्धापूर्वक अपने मन में यह भावना रखें:
“मुझे सभी प्रकार की सुख-शांति, स्वस्थता, सकारात्मकता एवं आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति हो तथा जीवन में आर्थिक समृद्धि और मंगल भावों की वृद्धि हो — ऐसी शुभ भावना के साथ मैं इस भक्तामर रक्षा पोटली का संकल्प करता/करती हूँ।”
इस संकल्प को 3 बार श्रद्धापूर्वक दोहराएँ।
📿 रक्षा पोटली बाँधने की विधि
भक्तामर रक्षा पोटली को दाहिने हाथ में 1 नवकार मंत्र का जाप करते हुए श्रद्धापूर्वक बाँधें।
पोटली धारण करते समय मन में शुभ, सकारात्मक एवं आध्यात्मिक भाव रखें।
श्रद्धा ही सबसे बड़ा संबल है
भक्तामर रक्षा पोटली को केवल एक वस्तु के रूप में नहीं, बल्कि भक्तामर स्तोत्र के प्रति श्रद्धा, विश्वास और सकारात्मक संकल्प के प्रतीक के रूप में धारण करें।









