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कैसे सेट करे लक्ष्य मोक्ष का ?

कैसे सेट करे लक्ष्य मोक्ष का ?

कोई भी फसल की प्राप्ति करने के लिए उसके बारे मे पूरी जानकारी होनी जरुरी है ठीक वैसे ही आज कल सब को मोक्ष के बारे में बहुत कुछ मालूम है लेकिन वो कैसे मिले क्या हमने हमारे लक्ष्य में उसको सेट किया है अगर हा तो क्या हम उसको पाने के मार्ग पर चल रहे है ? क्या दिन प्रति दिन हम ये महसूस कर रहे है ?

क्या आपको मालूम है हमारे जैन धर्म के ज्ञान के अनुसार हमें अगर जल्द से जल्द मोक्ष सिर्फ महा विदेह क्षेत्र में जन्म लेने से मिल सकता है जहा सर्वदा ये मार्ग मनुष्य योनी से चालू रहेता है

सबसे पहले हमें ये तय करना है की हमें वहा जन्म कैसे मिले ?

उसके लिए सबसे सरल और प्रभावी तकनीक है अनुमोदना की…. और दूसरी है प्रभावना की जैसे की और लोगो को ये लक्ष्य प्राप्ति में जुड़ना जो हमें हेल्प करेगा जब कभी हम ये मार्ग से भटक जाये तो वो हमें ये मार्ग पर ला देगा या हमें समूह उर्जा का लाभ देगा

अब हमें ये सोचना है की हमें मोक्ष कैसे चाहिए की सालो तक तप करने के बाद, उपसर्गों को सहन करने के बाद, लम्बे समय तक सेवा करने के बाद या किसी और लम्बी प्रोसेस के बाद…

कभी किसी ने सोचा है की एक ऐसी प्रक्रिया है जो हमें पल मात्र में मोक्ष की टिकेट दिला देती है जो पहले ये क्षेत्र में हुयी है और वो भी संसारी अवस्था में…

अब आप गहरी सोच में डूब गए होंगे की ये क्या बात है अगर पल मात्र में ये मिल जाता है तो आज तक हमने उसके लिए कुछ किया क्यों नहीं ? लेकिन आप कर भी कैसे सकते है जहा आपने अभी तक आपके ये लक्ष्य को सेट ही नहीं किया है

अगर आप चाहते है की ये बात आपको भी पता चले तो आइये सब से पहले हमारे युनिवेर्सल संकल्प के साथ जुड़कर उसे अपना संकल्प बनाये

युनिवर्सल संकल्प

“में शत प्रतिशत शारिरिक, मानसिक, अध्यात्मिक और आर्थिक स्वस्थ हु, शक्तिशाली हु, सुखी हु, समृध्ध हु और मुझे तीसरे भव में मोक्ष मील गया है”

जब आप ये लक्ष्य सेट करते है तब आप ये संकल्प की धारा में अपना जीवन जीना शुरू करेंगे और धीरे धीरे आपके विचार, वाणी और वर्तन सब ये संकल्प की लाइन में होने शुरू हो जायेंगे इसके बाद आप ये संकल्प के द्वारा मोक्ष मार्गी बन जायेंगे…

अब हमारे संकल्प के हिसाब से हमें यहाँ मोक्ष बीज बोना है तो जैसे हमें फसल के गुणों के हिसाब से बीज चुनते है ठीक वैसे ही हमें यहाँ मोक्ष के लिए बीज चुनना है

हमारा मोक्ष प्राप्ति का बीज ये है जो सब से सरल है…. हमारी आत्मा ये देह का उपयोग करके शुभ भाव और शुभ ध्यान में लीन होकर क्षपक श्रेणी में चढ़कर सारे घाती अघाती कर्म का क्षय होकर केवलज्ञान की प्राप्ति हो और आयुष्य कर्म पूर्ण होने पर मोक्ष प्राप्ति हो…

ये हमारी फसल है और यहाँ के क्षेत्र में हम सिर्फ अनुमोदना, प्रभावना और कर्म की स्थिति को बदलने की प्रक्रिया ही कर सकते है … जो हमारे संकल्प की उर्जा को और बढ़ाते है अब तक आप ने जैसा भी जीवन जिया हो लेकिन आप तुरंत ही ये संकल्प को अपना लक्ष्य बनाके अपना जीवन ये नए मार्ग पर ले जा सकते है…

अब आप को समज आ गया होगा की आपको अपने आत्मा की परिणिति ऐसी करनी है की हमें तीसरे भव में जरुर मोक्ष मिले…

वैसे एक बात में यहाँ बताना चाहूँगा की हमारी आत्मा की एक बार गति शुरू हुई तो उसकी अंतिम मंजिल मोक्ष यानि की उसके ओरिजिनल द्रव्य में मील जाना ही है लेकिन मनुष्य योनी का एक उत्तम और स्पेशल फीचर है जिसका प्रयोग करके हम जीतनी जल्दी मोक्ष प्राप्ति करना चाहते है वो यहाँ सिर्फ ये क्षेत्र मे अभी कर सकते है

 अब आपका लक्ष्य सेट हो गया है और उसकी शुरुआत भी कैसे करनी है वो थोड़ी बहुत आपको समज में आ गयी होगी अब हमें तीसरे भव में कैसे महाविदेह क्षेत्र में जन्म मिले उसके बारे में सोचना चालू करना है

वो कैसे जल्द से जल्द हो उसके लिए जो भी करना है वो करना है अब आप सोचते होगे की हम क्या कर सकते है तो में आपको बताना चाहूँगा की बिना दीक्षा लिए भी आप बहुत कुछ कर सकते है

सबसे पहले आपको सीमंधर स्वामी से कनेक्शन चालू करना होगा क्यूंकि उनकी शक्ति अचिन्त्य है अगर वो चाहे तो जरुर आपका संकल्प पूर्ण हो सकता है और वो करा भी सकते है सीमंधर स्वामी के साथ कनेक्शन चालू होने के बाद आपको अपने आप को शुभ भाव और शुभ ध्यान में कैसे बने लीन वो करना है और उसके लिए सब से पहले हमारे चहेरे को सदा के लिए प्रसन्न कैसे रखे वो शिखना है और उसके लिए प्रति दिन थोडा थोडा समय का उपयोग करके हमें ये शुरुआत करनी है जो बाद में हमारे जीवन के सभी कार्यो को प्रसन्नता के लिए ही करने वाले बना देगा एक बार आप प्रसन्न हो तो तुरंत ही शुभ भाव और शुभ ध्यान में जा सकते हो लेकिन यहाँ हमें देह को नहीं आत्मा को ये भाव में ले जाना है जिसके लिए आपको कायोत्सर्ग के माध्यम से आत्मा के लेवल में जाना है यहाँ हमें लम्बे समय तक ये नहीं करना है लेकिन सिर्फ शुरुआत करनी है आत्मा के लेवल का अनुभव करने की फिर तो हम तुरंत ये भाव में चले जायेंगे और जैसे ही हम ये भाव में पहुचे की हमें उसको शुभ भाव और शुभ ध्यान में ले जाना है

शुभ भाव और शुभ ध्यान में जाना और फिर आगे क्षपक श्रेणी के बारे में विस्तार से थोडा जानने के बाद आप वहा भी गए है और आगे की सारी प्रक्रिया का हमें वीडियो अपनी आत्मा की आँखों के सामने देखना है जो धीरे धीरे हमारे अवचेतन मन को ये कार्य में लगा देगा अगर एक बार ये अवचेतन मन लग गया तो समजो के हमारा आधा काम हो गया उसके बाद बस सिर्फ आपको चलते ही रहेना है चलते ही रहेना है और आप अपने संकल्प को सिध्ध करने के नजदीक पहुच जायेंगे

विशेष जानकारी के लिए संपर्क करे या हमारे साथ जुड़े रहिये

जय जिनेन्द्र….