ओनलाइन उर्जा हीलिंग मंदिर
मणिपुर चक्र
क्या आप जानते हैं कि आपका तीसरा ऊर्जा चक्र या सौर जाल चक्र (मणिपुर) कहाँ स्थित है?
लेकिन उससे पहले एक प्रश्न पूछें। क्या आप कभी ऐसी स्थिति में रहे हैं जहां आपको महसूस हुआ हो कि यह आपके लिए सही नहीं है? आमतौर पर हम इस तरह के संकेतों के गट फीलिंग या आंतरिक भावना कहते हैं। आप शारीरिक रूप से उस क्षेत्र में आत्मविश्वास और ज्ञान महसूस कर सकते हैं, जहां सौर जाल चक्र यानि मणिपुर चक्र (Manipura Chakra) स्थित है। यह चक्र आपके आत्मविश्वास से संबंधित है।
मणिपुर चक्र क्या है ?
सौर जाल चक्र को संस्कृत में मणिपुर कहा जाता है, जिसका अर्थ है चमकदार और उज्जवल रत्न। कभी-कभी नाभि चक्र के रूप में भी जाना जाता है। यह वह जगह है जहां आपक आत्मविश्वास, पहचान, जुनून और व्यक्तिगत शक्ति पैदा होती है। इस चक्र की ऊर्जा से हमारे अंदर आत्मविश्वास, एक शक्तिपुंज और स्फूर्ति पैदा करती है।
जब आपका मणिपुर चक्र (Manipura Chakra) संतुलित होता है, तो आपके अंदर बुद्धिमता, निर्णायक क्षमता और व्यक्तिगत शक्ति का संचार होता है। अक्सर इसे व्यक्तिगत शक्ति चक्र या योद्धा चक्र भी कहा जाता है, क्योंकि जो भावना उत्पन्न होती है वह युद्ध में जाने वाले एक बुद्धिमान योद्धा के समान है। इसके विपरीत जब सौर जाल चक्र असंतुलित होता है तो हम आत्मविश्वास में कमी महसूस कर सकते हैं, भ्रमित हो सकते हैं और इस बारे में सोचकर चिंतित होते हैं कि दूसरे हमारे बारे में क्या सोचते हैं। इसके अलावा इस चक्र का संतुलन बिगड़ने पर यह पाचन में खराबियां, परिसंचारी रोग, मधुमेह और रक्तचाप में उतार-चढ़ाव से संबंधित शारीरिक समस्याओं को भी जन्म दे सकता है।
आइए जानें सौर जाल चक्र की मूल बातें:
मणिपुर चक्र क्या नियंत्रित करता है – आत्म-मूल्य, आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान को नियंत्रित करता है।
स्थान – नाभि क्षेत्र के ठीक ऊपर आपके पेट पर स्थित है।
तत्व: अग्नि
रंग: पीला
बीज मंत्र: रं
संकेत असंतुलन / अवरुद्ध, सौर जाल चक्र:
एक अति सक्रिय सौर जाल चक्र के परिणाम यह हो सकते हैं।
- तुनुकमिज़ाज
- शासन करना
- छोटी छोटी चीजों का प्रबंधन
- लालच
- करुणा या सहानुभूति का अभाव
एक निष्क्रिय मणिपुर चक्र (Manipura Chakra) के परिणाम अनिश्चितता, असुरक्षा, आत्मविश्वास में कमी और खुद को जरूरतमंद समझना हो सकता है। एक गलत सौर जाल चक्र के शारीरिक लक्षण थकान, तंत्रिका तंत्र में समस्याएं, पाचन तंत्र में विकार और पेट में दर्द हो सकता है।
सौर जाल चक्र यानि मणिपुर चक्र को कैसे करें जागृत
सौर जाल चक्र को एक चमकीले सुनहरे पीले रंग द्वारा दर्शाया गया है। इसलिए आप अपने आहार में पीले फल या सब्जियों को शामिल कर सकते हैं। इस चक्र को जागृत करने के लिए आप योग और ध्यान की मदद भी ले सकते हैं। नीचे कुछ तरीके दिए गए हैं जिन्हें आप अपने जीवन में सौर जाल चक्र को संतुलित करने के लिए शामिल कर सकते हैं।
ध्यान करें
अपने सौर जाल के चक्र (मणिपुर चक्र) को संतुलित करने के लिए, ध्यान का अभ्यास करें। शुरू करने के लिए आप इन सरल चरणों का पालन कर सकते हैं।
किसी भी शांत और शुद्ध वातावरण में बैठें। फिर दोनों हाथों को ज्ञान मुद्रा या समान मुद्रा में रखें और आँखें बंद करें और रीढ़ को सीधा करके बैठें। इसके बाद अपनी धीमी, गहरी और लंबी सांस लेते और छोड़ते रहें। फिर अपने शरीर को पूरी तरह से आराम दें इसके बाद मणिपुर चक्र के स्थान पर ध्यान केंद्रित करते हुए पीले रंग के प्रकाश की कल्पना करें। इस पीले रंग की चमक को धीरे-धीरे महसूस करें, जिससे आपको स्पष्टता, आत्मविश्वास, आनन्द, आत्म भरोसा, ज्ञान, बुद्धि और सही निर्णय लेने की क्षमता का एहसास होगा। तत्पश्चात 3-5 मिनट के लिए इस उत्तेजना में ध्यान केंद्रित करें और फिर आराम करें।
योग का अभ्यास करें
सप्तचक्र के तीसरे ऊर्जा चक्र सौर जाल चक्र को जागृत करने और संतुलित करने में योगासनों का काफी महत्व है। कई ऐसे विशिष्ट योग हैं जो मणिपुर चक्र (Manipura Chakra) को लक्षित करते हैं। जैसे – वीरभद्रासन का अभ्यास करने से आत्मविश्वास का निर्माण होता है और सौर जाल चक्र संरेखित हो सकता है। इस चक्र के लिए सूर्य नमस्कार फायदेमंद है। यह शरीर को फुर्तीला और ऊर्जा से भरपूर बना देता है। पेट की मांसपेशियों को मजबूत करने, पाचन को संतुलित करने और व्यक्तिगत सशक्तिकरण की भावना लाने के लिए नाव मुद्रा या नवासना (नौकासन) एक और शानदार आसन है, जो तीसरे चक्र से संबंधित हैं।
मणिपुर चक्र दृढ़वचन यानि की थोट मंत्र
अंत में सौर जाल चक्र की ऊर्जा को संरेखित करने के लिए कई बार इस चक्र के दृढ़वचन को सकारात्मक ऊर्जा के लिए दोहरा सकते हैं या किसी भी समय आपको लगता है कि आपका चक्र अवरुद्ध हो सकता है। आप दिन के शुरू होने से पहले या ध्यान करने के पहले या बाद में इनमें से एक या एक से अधिक को दोहरा सकते हैं।
- मैं मजबूत और साहसी हूं
- मेरी शक्ति भीतर से आती है
- मैं कुछ भी कर सकता हूँ
- मैं महत्वाकांक्षी और सक्षम हूं
- मैं अपने उद्देश्य का पीछा करने के लिए प्रेरित महसूस करता हूं
- मैं सशक्त हूं और मैं दूसरों को सशक्त बनाता हूं
- मैं अपने लिए खड़ा हूं
- मुझे अपनी उपलब्धियों पर गर्व है
- केवल एक चीज जिसे मुझे नियंत्रित करने की आवश्यकता है वह यह है कि मैं किसी स्थिति पर कैसे प्रतिक्रिया देता हूं।
लाभकारी खाद्य पदार्थों का सेवन करें
एक संतुलित सौर जाल चक्र हमारे अंदर आंतरिक शांति, आत्मविश्वास और आत्मनियंत्रण की भावना पैदा करता है। इसलिए तीसरे चक्र को जागृत करने के लिए हमें पीले रंग के खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। जैसे- अनानास, पीले मिर्च, केला, मक्का, नींबू, और पीली करी आदि। इसके अलावा आप भोजन में ब्राउन राइस, जव्, राई, अंकुरित अनाज, बीन्स, सब्जियां, कार्बोहाइड्रेट से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
डायबिटीज़ में मिलेगा लाभ, मंत्र-मुद्रा-मेडिटेशन के साथ (Fight Diabetes With Manta-Mudra-Meditation)
अस्वस्थ्य जीवनशैली, तनाव, डिप्रेशन और चिंता ने तमाम बीमारियों को जन्म दिया है और उन्ही में से एक बीमारी है डायबिटीज़, जिसे मधुमेह या आम भाषा में शुगर भी कहा जाता है. यह एक ऐसी बीमारी है, जो सिर्फ़ बड़ों को ही नहीं, बल्कि बच्चों को भी तेज़ी से अपना शिकार बना रही है. इंटरनेशनल डायबिटीज़ फेडरेशन द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में 46 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज़ से पीड़ित हैं और 2045 तक यह संख्या 70 करोड़ के पार चली जाएगी. हमारे देश में स्थिति और भी भयावह है. भारत को विश्व का डायबिटीक कैपिटल कहा जाता है. ऐसा अनुमान है कि विश्व में डायबिटीज़ से पीड़ित होनेवाला हर पांचवां व्यक्ति भारतीय है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, 2000 में भारत में डायबिटीज़ के मरीज़ों की संख्या 3 करोड़ 20 लाख थी, जो 2013 में बढ़कर क़रीब दोगुनी 6 करोड़ 30 लाख हो गई. यह संख्या अगले 15 वर्षों में बढ़कर 10 करोड़, 10 लाख हो जाने का अनुमान है. आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे देश में हर साल 10 लाख से ज़्यादा लोग डायबिटीज़ के शिकार होकर मर रहे हैं. अमेरिका में यह मृत्यु का आठवां और अंधेपन का तीसरा सबसे बड़ा कारण बन गया है. इसी दिशा में मद्रास डायबिटीज़ रिसर्च फाउंडेशन द्वारा मई 2019 में किए गए अध्ययन के अनुसार, डायबिटीज़ की समस्या से जूझ रहे 47% भारतीयों को अपनी बीमारी के बारे में पता नहीं होता है, जबकि मात्र 24% भारतीय ही इसे नियंत्रित करने में सफल होते हैं.
डायबिटीज़ इसलिए भी अधिक खतरनाक बीमारी मानी जाती है, क्योंकि यह अपने साथ कई अन्य बीमारियां भी लाती है. यह हार्ट अटैक, किडनी फेल्यर और आंखों की रोशनी जाने की वजह बन सकती है. आमतौर पर डायबिटीज़ के 90.95 प्रतिशत मरीज़ टाइप 2 डायबिटीज़ से पीड़ित होते हैं. एक ऐसी बीमारी है, जिसमें पैंक्रियाज़ पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का निर्माण नहीं करता, जिससे रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर बढ़ जाता है. निश्चित रूप से इसका एक बड़ा कारण पिछले 4-5 दशकों में फास्टफूड का बढ़ता चलन, खान में शक्कर, मैदा और अनहेल्दी खाद्य पदार्थों का अत्यधिक प्रयोग, असक्रिय जीवनशैली व एक्सरसाइज़ की कमी है. हालांकि ये ऐसी बीमारी है जिसमें दवा से ज़्यादा लाइफस्टाइल और डायट में बदलाव का असर होता है. डॉक्टरों के अनुसार, डायबिटीज़ से बचने के लिए आहार व दिनचर्या संतुलित व संयमित होनी चाहिए, साथ ही डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए नियमित व्यायाम जरूरी है. दवाओं, डायट व एक्सरसाइज़ के साथ-साथ मंत्र, मुद्रा व मेडिटेशन भी अहम् भूमिका निभा सकता है. इस दिशा में हुए शोध के अनुसार, लगभग 70% डायबिटीज़ के मरीज़ योग, मुद्रा व मंत्र के सामूहिक प्रयास से ठीक हो जाते हैं, जबकि 20% मरीज़ों का इंसुलिन की खुराकें कम हो जाती हैं.
योग विज्ञान में डायबिटीज़ को नियंत्रित करने के लिए बहुत उपयोगी मंत्र व मुद्रा बताई गई है. डायबिटीज़ नियंत्रित रखने में कारगर मुद्रा है समान मुद्रा. समान मुद्रा एक बहुत शक्तिशाली मुद्रा है. ये हमारे पाचन तंत्र व पेट के सिस्टम को ठीक करती है. इसे 10 मिनट सुबह-शाम करने से डायबिटीज़ के मरीज़ों को बेहद लाभ मिलता है, क्योंकि इससे प्राणिक शक्ति संतुलित होती है. ग़ौरतलब है कि हमारे पेट में समान वायु चलती है, इसलिए समान मुद्रा पैनक्रियाज़ को समान सिस्टम में लेकर आती है.
समान मुद्रा लगाने के लिए हथेलियों को घुटनों पर रखकर पांचों उंगलियों के अग्रभाग को आपस में मिलाएं और इसके साथ ओम अग्नि देवाय नमः का जाप करें. इस मंत्र के माध्यम से हम अग्नि देव को प्रणाम करते हैं और अग्नि देव से यह प्रार्थना करते हैं कि हमारे पेट में जो समान वायु है, उसे वापस जागृत करें और उन्हें संतुलित करें. इस मंत्र का उच्चारण करते समय वाणी थोड़ी ऊंची रखनी चाहिए. मंत्र के माध्यम से हम अग्नि का आह्वान करते हैं, क्योंकि पेट जठराग्नि कमज़ोर या अधिक हो जाने पर पैंक्रियाज़ की प्रोडक्शन क्षमता कम हो जाती है, उसे मंत्र के माध्यन से वापस जाग्रत करते हैं. मंत्र के वायब्रेशन और शक्ति से डायबिटीज़ जैसी विकराल समस्या से मुक्ति मिलती है. इसके साथ योग व ध्यान साधना चमत्कारी परिणाम दे सकती है.
मंत्र और मुद्रा के साथ मेडिटेशन करने से अधिकतम लाभ मिलता है. मेडिटेशन एक ऐसी दवा की तरह काम करता है, जिसके जरिए हर तरह की बीमारी का इलाज किया जा सकता है. मेडिटेशऩ करने से हमारा पूरा शरीर शांत हो जाता है और समस्त तनाव दूर हो जाता है. रिसर्च बताते हैं कि ध्यान अभ्यास के दौरान दिमाग़ी तरंगे धीमी होकर 4-10 हर्ट्स पर काम करने लगती है, जिससे कि हमें पूरी तरह से शांत होने का एहसास मिलता है. इससे हमारे शरीर को भी अनेक लाभ मिलते हैं, जैसे कि बेहतर नींद आना, रक्तचाप में कमी आना, रोग-प्रतिरोधक क्षमता और पाचन प्रणाली में सुधार आना और दर्द के एहसास में कमी आना इत्यादि. ये सभी लाभ के ध्यान से हमें अपनेआप ही मिलते हैं. डायबिटीज़ पर नियंत्रण के लिए समान मुद्रा लगाकर ओम अग्नि देवाय नमः का उच्चारण करते हुए ध्यान में उतर जाएं और मणिपुर चक्र में पूरी तरह तल्लीन हो जाएं. जैसे ही आपका मणिपुर चक्र यानी नाभिचक्र संतुलित होगा, आपकी पैक्रियाज़ का फंक्शन भी संतुलित होने लगेगा. ऐसा होने पर आपके शरीर को अपनेआप इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में मिलने लगेगी. जिससे डायबिटीज़ की समस्याओं से मुक्ति के द्वार खुल जाएंगे.
सिर्फ डायबिटीज़ ही नहीं, ध्यान और मंत्र-मुद्रा की मदद से आप हृदय संबंधी रोग, ब्लडप्रेशर, जोड़ों में दर्द जैसी 1-2 नहीं, बल्कि 48 बीमारियों से निजात पा सकते हैं. विशेष जानकारी के लिए हमारा संपर्क करे परेश दोशी – 9712137917
भक्तामर की 17th श्लोक का उपयोग हमें ये ठीक करने मदद कर सकता है क्युकी इसमे भगवन को सूर्य से भी अदिक प्रकाश और उर्जावान माना गया है और सूर्य से कई गुना अधिक उसके जैसी उर्जा से हमारा मणिपुर चक्र संतुलित हो सकता है ऐसा ध्यान रखते हुए अगर हम आराधना करे तो मणिपुर चक्र संतुलित और उर्जावान हो जायेगा
लेकिन साथ में अपने जीवन में और विचारो और भावनाओ में जो बदलाव लाना है वो भी उतना जरुरी है
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