उर्जा क्या है ?
उर्जा के बहुत सारे प्रकार है आज के वैज्ञानिक जगत में हम पते है उसके अलग अलग नाम जैसे की भौतिक शक्ति, रासायनिक शक्ति, अध्यात्मिक शक्ति विगेरे विगेरे… वैसे उर्जा एक प्रकार की शक्ति के स्वरूप में ही होती है इसके अलग अलग रूप हो सकते है जिसमे किसी किसी को देखा जा सकता है और किसी किसी का सिर्फ अनुभव ही कर सकते है और कोई कोई तो ऐसे स्वरूप में है की जिसका अनुभव करने के लिए भी बहुत कुछ करना पड़ता है जैसे तप, योग, ध्यान विगेरे विगेरे
उर्जा का अनुभव कैसे करे ?
आप सब ने हमारे भक्तामर हीलिंग कोर्स में इसके बारेमे पढ़ा ही होगा हम लोग दिन भर में अलग अलग प्रकार की उर्जा के अनुभव करते ही रहते है जैसे की अग्नि की उर्जा, पानी की उर्जा, सूर्य की उर्जा, खोराक की उर्जा, इवन हम लोग शब्द यानि की ध्वनी उर्जा का भी अनुभव करते है
उर्जा के ये अनुभव हमारे मन और शरीर की उर्जा को प्रभावित करते है जैसे की किसी के गुस्से वाले शब्द आपके खून के दबाव को बढ़ा देता है तो किसी के प्रेम भरे शब्द हमारे अंदर आनंद की उर्जा भर देते है
सब से बड़ी बात ये है की इन सभी उर्जा का अनुभव हमें तब होता है जब ये सब कुछ हमने कोई इच्छा की है या हमारा ये निर्णय है या हम उसे पसंद या ना पसंद करते है इन सब का अर्थ है की जब जब हम संकल्प करते है तो हमें उर्जा का अनुभव होता है
हमारे धर्म ध्यान या आराधना में भी हमें उर्जा का अनुभव तब होता है जब जब हम कोई संकल्प के साथ इसे करते है और हमारी आराधना की प्रक्रिया हमारे संकल्प की सिध्धि के प्रति होनी चाहिए |
जब जब हम किसी उर्जा के उत्सर्जन में भाव से जुड़ते है तो हमें तुरंत ही उसका अनुभव होना शुरू हो जाता है उदहारण के तौर पर अगर हम कभी कोई सत्संग के प्रोग्राम यानि की भावना में जाते है तब हम वहा कुछ गाते या बजाते भी नहीं है लेकिन जब बहव से वहा बैठकर जुड़ते है तो तुरंत ही हमारे शरीर और मन पर उसकी असर हो जाती है और पुराणी कहानी में हमने सुना है की इसी भावधारा से केवल ज्ञान की प्राप्ति भी हो सकती है या तो रावण की तरह तीर्थंकर नाम कर्म भी बांध सकते है
इसी प्रकार से हम अगर कोई बुरे प्रसंग या बुरी घटना या उसकी बाते या विचारो के साथ अपने आप को भाव से जुड़ते है तो तुरंत ही उसकी असर हमारे शरीर और मन पर होने लगती है जैसे की किसी की निंदा को जयादा देर तक सुनने या बोलने से मस्तक दुखने लगता है और किस ऐसे रोग के बारे में सुनकर अगर हम उसी बातो से भाव से जुड़ते है तो वो ही रोग हमें भी होने की पूर्ण संभावना है
उर्जा का सही परिवहन और संतुलन ही हमारी स्वस्थता का राज है और अब आप को पूरी तरह समाज में आ गया होगा की अगर आप स्वस्थ होना या रहेना चाहते है तो आपको भाव से स्वस्थता की बातो, विचारो और घटनाओ के साथ ऐसी ही भाव धारा वाली व्यक्ति के साथ जुड़ना है गलती से भी आपने इसके विरुध्ध उर्जा के साथ अपने आप को जोड़ा की आप तुरंत अस्वस्थ हो जायेंगे
हीलिंग का अर्थ है उर्जा को संतुलित और योग्य तरीके से प्रवाहित करना
सेल्फ हीलिंग में अपनी ही उर्जा को कैसे संतुलित और प्रवाहित करना वो है उसके बहुत सारे तरीके है उसमे सब से अच्छा तरीका जो हमें लगे वो पसंद करना है किसी के कहने से कोई भी तरीका उपयोग में लेने से परिणाम कम या तो नहीं मिलता है
जैन धर्म में स्तोत्र और मंत्र की रचना एक स्पेसिफिक आवश्यकता के लिए की गयी है अगर हम उसका उपयोग अपने तरीके से करते है तो हमें परिणाम हमारी मान्यता और मन की शक्ति का ही मिलता है
अगर आपमें जरा भी भक्ति का अंश नहीं है और आप भक्तामर का प्रयोग करते है हीलिंग के लिए तो आपको परिणाम कम या तो नहीं मिलेगा इसका प्रयोग करने के लिए आपमें भक्ति और उसमे विश्वास का होना बहुत ही जरुरी है
नवकार की बात करे तो आपको पंच परमेष्ठी की गुण उर्जा में पूर्ण विश्वास होने के साथ साथ आप यही गुण उर्जा के माध्यम से उन्हों ने जो प्राप्त किया है उसी को अपना अंतिम लक्ष्य मानते है तब ये आपको फल देता है
इस तरह से आप कोई भी मंत्र स्तोत्र के बारे में सोचकर उसका सही उपयोग कर सकते है

