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भक्तामर गाथा 14: आधि-व्याधि, शत्रु भय निवारण एवं बुद्धि-वृद्धि की गाथा

Bhaktamar Gatha 14

🌟 भक्ति की अमर गाथा – भाग 14

भूमिका भक्तामर स्तोत्र केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि यह 48 दिव्य मंत्रों की ऐसी श्रृंखला है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम बनती है। प्रत्येक गाथा में चमत्कारी ऊर्जा छिपी है — स्वास्थ्य, समृद्धि और अध्यात्मिक उन्नति के लिए।

इस ब्लॉग श्रृंखला में हम 48 गाथाओं की विस्तृत व्याख्या, साधना विधि, चमत्कारी लाभ और व्यवहारिक प्रयोग आपके समर्पण में प्रस्तुत करेंगे।


गाथा 14: आधि-व्याधि व शत्रुभय नाशक।

श्लोक

सम्पूर्ण- मण्डल-शशाङ्क -कला-कलाप-
शुभ्रा गुणास् – त्रि-भुवनं तव लङ्म्यन्ति।
ये संश्रितास् – त्रि-जगदीश्वरनाथ-मेकं,
कस्तान् निवारयति सञ्चरतो यथेष्टम्॥


सरल अर्थ:

यह गाथा कहती है:

“हे त्रिलोकेश्वर प्रभु! जैसे पूर्णिमा के चंद्रमा की किरणें संपूर्ण आकाश को प्रकाशित कर देती हैं, वैसे ही आपके शुभ और निर्मल गुण तीनों लोकों में व्याप्त हैं। जो जीव एकमात्र आपके शरणागत हो जाते हैं, उन्हें कोई भी बाधा, भय या शत्रु रोक नहीं सकता।”


आध्यात्मिक भावार्थ:

  • यह गाथा प्रभु के सर्वव्यापी, शुद्ध और कल्याणकारी गुणों का वर्णन करती है।
  • जो साधक पूर्ण श्रद्धा से प्रभु की शरण में जाता है, उसके जीवन से आधि (मानसिक पीड़ा) और व्याधि (शारीरिक रोग) दोनों समाप्त होने लगते हैं।
  • यह श्लोक विशेष रूप से शत्रु भय, वात रोग, और बुद्धि-विकास के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।

गाथा 14 के चमत्कारी लाभ

लाभ क्षेत्रप्रभाव
आधि (मानसिक कष्ट)चिंता, भय, तनाव और अवसाद में राहत
व्याधि (शारीरिक रोग)दीर्घकालीन रोगों में शमन
वात रोगजोड़ों, नसों और वात दोष में लाभ
शत्रु भय निवारणविरोधियों से रक्षा, नकारात्मक प्रभाव से सुरक्षा
बुद्धि और गुण-वृद्धिस्मरण शक्ति, विवेक और गुणों में वृद्धि
सरस्वती कृपाविद्या, वाणी और ज्ञान में प्रगति

साधना विधि (Bhaktamar Gatha 14 Sadhana)

  1. प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र पहनें।
  2. जिनप्रतिमा के समक्ष दीपक जलाएं।
  3. गाथा 14 का 21, 51 या 108 बार पाठ करें।
  4. पाठ के समय मन में यह भाव रखें कि प्रभु की उज्ज्वल चंद्र-किरणें आपके मन और शरीर को शुद्ध कर रही हैं।
  5. अंत में विद्या, स्वास्थ्य और निर्भयता के लिए प्रार्थना करें।

मंत्रोक्त ऊर्जा विज्ञान

  • यह गाथा आज्ञा चक्र और मूलाधार चक्र को संतुलित करती है।
  • इससे साधक का Protective Aura सशक्त होता है और रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
  • मानसिक स्पष्टता, आत्मबल और सकारात्मक कंपन विकसित होता है।

Bhaktamar Mantra Healing Insight:

हर दिन एक गाथा, हर गाथा एक क्रांति।
जैसे पहला कदम जीवन की दिशा तय करता है, वैसे ही गाथा 14 का पाठ आपके जीवन को आध्यात्मिक दिशा में मोड़ सकता है।


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