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वास्तु शास्त्र पश्चिम दिशा

वास्तु शास्त्र
पश्चिम दिशा

वास्तु शास्त्र अनुसार पश्चिम दिशा का कारक शनि, यह दिशा डाईनिंग रूम, स्टोर रूम, चक्की, मिक्सी, कचरे का स्थान और कटाई की मशीन की कारक है।

पश्चिम मुखी घर यह बताता है कि उस घर के मुखिया ने अपने जीवन में काफी संघर्ष किया है और परिवार के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को अच्छे के निभाने के प्रयास किये हैं।

यदि पश्चिम दिशा में रसोई हो तो रसोई घर की मालकिन के आधीन होती है, उसको बहु बेटियों का अच्छा सुख मिलता है। अन्नपूर्णा माता की कृपा घर पर होती है, और खाना इतना बनता है कि हमेशा बच जाता है, या तो दान करना पड़ता है या जूठन के रूप में कचरे में जाता है।

यदि इस दिशा में बेडरूम होगा तो घर के मुखिया को उसके कामकाज में बाधा आती है। कामकाज में पैसा अटकता है जिस से आर्थिक समस्या होती है।

यदि इस दिशा में कबाड़ रखा हो, दीवारें खराब हो, सीलन हो तो परिवार के सदस्य आलसी और सुस्त होते हैं। कारोबार और आर्थिक लेन देन में धोखा होता है। परिवार के सदस्यों में मनमुटाव और झगड़े होते हैं।

यदि इस दिशा में रसोई का राशन जमा करके रखा हो तो परिवार के सदस्य बुद्धिमान होते हैं। यातायात के साधनों से जुड़े कारोबार से लाभ कमाते हैं।

यदि इस दिशा में तिजोरी हो, आभूषण और शिंगार का सामान रखा हो तो उस घर की आर्थिक तरक्की धीरे धीरे होती है।

यदि इस दिशा में पूजा का स्थान हो तो मुखिया लालची होता है, पेट गैस के रोग से पीड़ित होता है।

यदि इस दिशा में बाथरूम बना हो तो घर में सुख साधनों की कमी होती है, मुखिया को भौतिक सुख की इच्छा नहीं रहती, बेवजह के खर्च बने रहते हैं, कारोबार, आर्थिक लेन देन में पैसा अटकता है जिस से आर्थिक स्थिति खराब होती है।

वास्तु अनुसार घर की इस दिशा में स्टोर रूम, डाइनिंग हाल और अगर अग्नि कोण में रसोई ना बना सके तो यहां रसोई भी बना सकते हैं